17 November 2020 11:35 PM

-रोशन बाफना
ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। कोरोना काल में जब डॉक्टर, चिकित्सा कर्मी, पुलिस आदि सर्वस्व लुटाकर भी जन सेवा से पीछे नहीं हट रहे, उसी इंसानियत के दौर में एक महिला नर्सिंग कर्मी द्वारा आत्महत्या की धमकी देकर कोविड अस्पताल से ड्यूटी हटवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वहीं एक नर्सिंगकर्मी ने मुख्य नर्सिंग अधीक्षक को पद से हटवाने की धमकी दी है। अधिकृत सूत्रों के मुताबिक की कोविड अस्पताल में इन दोनों सहित अन्य की इंचार्ज के रूप में ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन इन्होंने कोरोना के भय से कोविड आईसीयू में ड्यूटी करने से मना कर दिया। मामले में गहमागहमी से लेकर पत्रबाजी चल रही है तो वहीं डॉक्टरों व नेताओं की सिफारिशें भी खूब आईं। सूत्रों के मुताबिक अंततः आशालता नाम की नर्सिंग अपने पति के साथ मुख्य नर्सिंग अधीक्षक के पास जाकर सुसाइड करने की धमकी दे आई। इसके बाद ये नर्स पीबीएम के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ बीएल खजोटिया व प्रिंसिपल एस एस राठौड़ के समक्ष पेश हुई। आखिर सेवा नियमों का उल्लघंन करने वाली इस नर्स को अन्यत्र ड्यूटी दे दी गई। वहीं मनोज पांडे ने भी अब तक ज्वाइनिंग नहीं ली है। आरोप है कि मनोज ने मुख्य नर्सिंग अधीक्षक को धमकी दी है कि वह उसे पद से हटना देगा तथा किसी भी कीमत पर कोविड आईसीयू में ड्यूटी नहीं करेगा। बताया जा रहा है कि लंबे समय इन्होंने मैटर्न ऑफिस की आरामदायक ड्यूटी की, तब तक इन्हें कोरोना का डर नहीं सताया। लेकिन ड्यूटी जब आईसीयू में दी गई तो सर दर्द होने लगा। चौंकाने वाली बात तो यह है कि मुख्य नर्सिंग अधीक्षक के आदेशों का लगातार मखौल बन रहा है। यहां तक कि मनोज द्वारा अधीक्षक से लिखित में सवाल किए जा रहे हैं।
इस तरह सेवा नियमों का मखौल बनाने वाले कार्मिकों पर कार्रवाई की बजाय उनका राजनीतिक समर्थन खतरनाक है। सवाल यह है कि ऐसा ही चलेगा तो सरकारी कर्मचारियों किसी की ग्रिप में कैसे रहेंगे ???
RELATED ARTICLES
10 September 2026 04:56 PM
02 November 2021 11:35 AM