16 September 2026 09:50 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर।(पत्रकार रोशन बाफना की विशेष रिपोर्ट) बीकानेर नगर निगम चुनाव में चुनावी बातें तो बहुत हो चुकी। अब हम शिक्षा की भी कुछ बात कर लेते हैं। शिक्षा इसलिए क्योंकि देश में शिक्षा का अभाव ही सबसे बड़ी समस्या है।
हम आपको बताते हैं कि बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों के चुनाव में जीत हासिल कर पार्षद बने कितने पार्षद अच्छे पढ़ें लिखे हैं।
गणना में पता चला है कि 80 में से 15 पार्षद 12वीं पास है, जबकि 2 पार्षद 11वीं, 12 पार्षद 10वीं, 8 पार्षद 8वीं, 1 पार्षद 5वीं पास है।
वहीं 10 सामान्य साक्षर हैं मतलब सामान्य पढ़ लिख लेते हैं, हस्ताक्षर कर लेते हैं। जबकि एक पार्षद ने 10वीं के साथ आईटीआई कर रखी है।
उच्च शिक्षित पार्षदों की बात करें तो वो ये केवल 31 है। इनमें कुछ ने स्नातक(ग्रेजुएशन) कर रखी है, जबकि कुछ स्नातकोत्तर भी है। इस 31 के आंकड़े में एक-एक बीएससी, बीटेक व सीए भी है। तो कुछ एमए एलएलबी, बीएड एमए, बीएड एमए एलएलबी भी है।
-ये आंकड़ा करता है सोचने पर मजबूर: 40 पार की उम्र वाले पार्षदों की शिक्षा को लेकर आंख मूंदी जा सकती है। मगर 40 की उम्र तक के पार्षद शिक्षित हो तो जनता का कुछ भला हो सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि 26 वर्ष के दो पार्षद मात्र 12वीं पास है। वहीं 30 वर्ष का एक पार्षद 12वीं पास है। इसी तरह 31 से 40 वर्ष के ग्रुप में 13 पार्षद शिक्षा को लेकर निराश करते हैं।
31 वर्ष के दो पार्षद 12वीं, 32 वर्ष का एक पार्षद 10वीं, 33 वर्ष का एक पार्षद 10वीं व एक 12वीं, 34 वर्ष का एक 8वीं व एक 12वीं, 35 वर्ष का एक 10वीं, 37 वर्ष का एक 10वीं, 38 वर्ष के दो 10वीं व 40 वर्ष का एक पार्षद 5वीं पास है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि 38 वर्षीय एक पार्षद सामान्य साक्षर ही है।
सवाल यह है कि आख़िर शिक्षा के पैमाने पर जनता को उनके प्रतिनिधि क्यों नहीं मिलते? केवल जाति के आधार पर आरक्षण क्यों दिया जाता है? जातीय आरक्षण की आज भी आवश्यकता है मगर इसके साथ शिक्षा को महत्व क्यों नहीं? क्या यह जनता के साथ छल है?
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