26 March 2026 01:37 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। (पत्रकार रोशन बाफना की रिपोर्ट) राजस्थान और राजस्थानी भाषा प्रेमियों के लिए दुखद ख़बर है। राजस्थानी भाषा की एकमात्र सरकारी पत्रिका जागती जोत का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ने यह रजिस्ट्रेशन रद्द किया है। ऐसे में भाषा की मान्यता के लिए तड़प रहे राजस्थान को यह काफी बड़ा झटका है। दरअसल, किसी भी अख़बार या पत्रिका को निकालने के लिए आरएनआई में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। आरएनआई अब पीआरजीआई हो चुका है। रजिस्ट्रेशन के बाद प्रकाशक द्वारा प्रति वर्ष "वार्षिक विवरणिका" यानी एनुअल स्टेटमेंट भेजना अनिवार्य होता है। ऐसा ना करने पर विभाग द्वारा उस पत्रिका या अखबार का टाइटल रजिस्ट्रेशन ही रद्द कर दिया जाता है। दंड स्वरूप जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
-क्या है जागती जोत: जागती जोत राजस्थानी भाषा में निकलने वाली एक मासिक पत्रिका है। यह पत्रिका राजस्थान सरकार की राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा प्रकाशित की जाती है। राजस्थानी भाषा, साहित्य व संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संभवतया 1980 में यह पत्रिका शुरू की गई थी।
अकादमी अध्यक्ष ही इस पत्रिका के प्रबंध संपादक होते हैं। अध्यक्ष मनोनित पद हैं। वहीं अकादमी सचिव एक प्रशासनिक पद है। अध्यक्ष का मनोनयन ना होने की स्थिति में बीकानेर के संभागीय आयुक्त इस अकादमी के अध्यक्ष होते हैं। वर्तमान में संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा अकादमी के अध्यक्ष हैं, वहीं सचिव शरद केवलिया हैं। केवलिया को 2019 में अकादमी सचिव लगाया गया था।
-टाइटल रजिस्ट्रेशन रद्द होने के पीछे कौन जिम्मेदार : बताया जा रहा है कि अकादमी के प्रशासनिक कार्य का जिम्मा अकादमी सचिव का होता है। लंबे समय से एनुअल स्टेटमेंट ही नहीं भेजा गया। इसी वजह से पीआरजीआई ने जागती जोत का रजिस्ट्रेशन ही रद्द कर दिया। बता दें कि देशभर की हजारों पत्रिकाओं व अखबारों के टाइटल रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए हैं। लेकिन जागती जोत राजस्थानी भाषा का एक मात्र सरकारी मुखपत्र है। ऐसे में इसका टाइटल रजिस्ट्रेशन रद्द होना राजस्थानी भाषा प्रेमियों के लिए बड़ी हानी है। जहां एक तरफ हम राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उसी दौर में हमारी भाषा की एकमात्र सरकारी पत्रिका का यह हश्र सवाल खड़े करता है। सवाल उठता है कि जो हमें मिला, उसे ही हम संभाल क्यों नहीं पाए?
-अपील का निकल चुका समय, अंधेरे में अकादमी: टाइटल रजिस्ट्रेशन के विषय में अकादमी अध्यक्ष संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा से पूछा तो उन्होंने इस विषय में जानकारी ना होने की बात कही। मीणा ने कहा, सचिव को पूछेंगे। वहीं अंदरखाने ख़बर यह भी है कि सचिव को भी टाइटल रजिस्ट्रेशन रद्द होने की जानकारी नहीं है। इसी वजह से अपील नहीं की गई और अब अपील का समय भी निकल चुका। दरअसल, टाइटल रजिस्ट्रेशन जनवरी के प्रथम सप्ताह में ही रद्द हो गया।
-अब सीधे खटखटाना होगा बड़े घर का दरवाजा: अपील का समय तो निकल चुका है लेकिन जानकारी मिली है कि अकादमी अब भी संभली तो कुछ हो सकता है। लेकिन अब ऊंची जैक लगानी पड़ेगी।
अब देखना यह है कि राजस्थानी भाषा के अस्तित्व की जिस पूंजी को अकादमी संभाल नहीं पाई, उसे वापिस हासिल कर पाती है या नहीं? हालांकि पत्रिका सरकारी है इसलिए संभव है कि सबकुछ ठीक हो जाए।
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