02 October 2026 11:15 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। शराब इतनी ही जरूरी है तो नियम क्यूं है? आठ बजे बाद शराबबंदी का नियम रोज टूटता है, टूटना ही है, शराब बिक्री का समय जो ग़लत है। आठ बजे तक तो अधिकतर व्यक्ति काम-धंधे से ही फ्री नहीं होते। तो शराब कैसे खरीदे? शराब के लिए कोई कर्मचारी सेठ का मुनीम तो भेजने से रहा। काम से छुट्टी मिलेगी तभी तो शराब खरीदेगा। यहां तक तो ठीक है लेकिन ड्राई डे यानी सूखा दिवस पर शराब बिक्री कहां तक सही है?
ड्राई डे पर शराब की खरीद, बिक्री व परिवहन पर प्रतिबंध होता है। गांधी जयंती पर भी सूखा दिवस घोषित है। बीकानेर में सूखा दिवस पर भी शराब बिकी। रानी बाजार पुलिया के पास वाले वाइन शॉप ने पीछे का दरवाजा खोल रखा था। कोई भय नहीं। इतनी निडरता से शराब बेचना सवाल खड़े करता है। रात आठ बजे का नियम भी थोड़ा गया और सूखा दिवस का नियम भी तोड़ा। आख़िर इतना हौसला देता कौन है? बता दें कि 15 अगस्त को भी सूखा दिवस था। उस रात भी इस वाइन शॉप पर जमकर शराब बिक्री हुई। सुना है ब्लैक में भी शराब मिलती है।
ऐसा नहीं है कि केवल यह एक ही दुकान है जिसने सूखा दिवस पर शराब बेची हो। गंगाशहर के नोखा रोड़ वाली शराब की दुकानें भी जमकर शराब बेच रही थी। जनता प्याऊ वाली शराब की दुकान ने भी हमेशा की कोई कसर नहीं छोड़ी।
पंडित धर्म कांटे के पास वाले ठेके पर भी शराब मिल रही थी। बस फर्क इतना रहा कि पुलिया के पास वाली वाइन शॉप ने फुल रोशनी में खुल्लमखुल्ला पीछे के दरवाजे से शराब बेची। सबकुछ साफ दिख रहा था मगर जनता को, पुलिस व आबकारी शायद रेस्ट पर थे। इसके आसपास की अन्य दुकानों ने भी शराब बेची।
सवाल यह है कि पुलिस व आबकारी सूखा दिवस पर शराब बिक्री क्यों नहीं रोक पाए? जबकि सूखा दिवस की धज्जियां खुल्लमखुल्ला उड़ाई जा रही थी। जैसे 15 अगस्त वाला सूखा दिवस सूखा नहीं था वैसे ही गांधी जयंती वाला सूखा दिवस भी तर-बतर रहा। देखें वीडियो
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