11 August 2026 01:25 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। (पत्रकार रोशन बाफना की रिपोर्ट) कहते हैं ग्राहक भगवान होता है। ऐसा शायद इसलिए कहा जाता होगा, क्योंकि भगवान स्वयं तो हर एक के पास रोज रोज धरती पर आ नहीं सकते तो हमारे पालन-पोषण के लिए ग्राहक भेजते होंगे।
इन्हीं से हम कमाते हैं और इन्हीं की खाते हैं। लेकिन कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठान इन ग्राहक रूपी भगवान के साथ भी छल कर बैठते हैं। ऐसा ही एक मामला बीकानेर से आया है। मगर ग्राहक रूपी भगवान से छल करने वाले इस व्यापारी को मुंह की खानी पड़ी। उपभोक्ता न्यायालय ने उसे दंडित किया है।
ये था मामला: बीकानेर निवासी हिमांशु गौतम 28 जून 2025 की अपनी पत्नी के साथ पंचशती सर्किल स्थित फरिश्ता गार्डन एंड रेस्टोरेंट में डिनर करने गये थे। कुल 840 रूपए का बिल थमाया गया। बिल का भुगतान करने पर पता चला कि 20 रूपए एमआरपी वाली पानी की बोतल के फरिश्ता ने 35 रूपए वसूल लिए हैं। शायद ऐसा भूलवश हुआ हो, यह मानकर हिमांशु ने रेस्टोरेंट संचालक से बात की। तो जवाब मिला हमारी यही रेट है। उल्टा अभद्रता से बात की गई।
इस पर हिमांशु गौतम ने अधिवक्ता अनिल सोनी व शिव कुमार के मार्फत फरिश्ता रेस्टोरेंट को विधिक नोटिस थमाकर अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाने को कहा। मगर फरिश्ता रेस्टोरेंट ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया और ना ही अतिरिक्त वसूले गए 15 रूपए लौटाए।
-उपभोक्ता न्यायालय में दर्ज करवाया केस, फिर हुआ न्याय: नोटिस का जवाब व अतिरिक्त राशि दोनों ही ना मिलने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया गया।
आयोग ने परिवाद स्वीकार करते हुए आरोपी पक्ष को आयोग में हाजिर होने हेतु नोटिस भेजे। कमाल की बात यह है कि फरिश्ता की तरफ से आयोग में भी कोई प्रस्तुत नहीं हुआ। लगातार नोटिस देने के बावजूद आरोपी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इस पर आयोग ने 20 नवंबर 2025 को इकतरफा सुनवाई आरंभ कर दी। परिवादी द्वारा पेश किया गया बिल व अन्य साक्ष्यों तथा तर्कों पर विचार करते हुए आयोग अध्यक्ष शिव शंकर व सदस्य सावित्री सुथार ने हिमांशु गौतम के पक्ष में फैसला सुनाया है।आयोग ने यह माना है कि फरिश्ता रेस्टोरेंट ने अवैध रूप से एम आर पी से 15 रूपए अधिक राशि वसूली है।
आयोग ने फरिश्ता को अतिरिक्त वसूले गए 15 रूपए 20 जून 2025 से अब तक की अवधि का नौ प्रतिशत ब्याज जोड़कर लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त परिवादी को हुई मानसिक व आर्थिक क्षति के मुआवजे के रूप में दस हजार रूपए तथा पांच हजार रुपए परिवाद व्यय के देने का आदेश दिया है। बता दें कि आयोग ने इस फैसले से यह संदेश भी दिया है कि रकम छोटी हो या बड़ी, अवैध वसूली अपराध है।
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