22 April 2021 12:09 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। पीबीएम में चल रही ऑक्सीजन की कमी से पैदा हुए तनाव में राहत मिल गई है। जलदाय एवं ऊर्जा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला के प्रयासों से यह सब संभव हुआ है। लिक्विड ऑक्सीजन की खेप आज बीकानेर पहुंच गई है। पीबीएम चिकित्सालय में अब 800 बैड पर ऑक्सीजन उपलब्ध है।
जलदाय मंत्री डॉ. कल्ला ने बताया कोरोना वार्ड की व्यवस्थाओं के बारे में पिछले दिनों बीकानेर के पीबीएम चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. परमेंद्र सिरोही, समाजसेवी कन्हैया लाल कल्ला और पीबीएम प्रशासन से जुड़े जितेन्द्र आचार्य की ओर से लिक्विड ऑक्सीजन की कमी के बारे में फीडबैक प्राप्त हुआ था। इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर में ऑक्सीजन सप्लाई के प्रभारी अधिकारी से चर्चा कर उन्हें बीकानेर के लोगों की इस जरूरत के बारे में अवगत कराया। इस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए राज्य सरकार ने बीकानेर के लिए अतिरिक्त लिक्विड ऑक्सीजन उपलब्ध कराई है, जो बुधवार को बीकानेर के पीबीएम चिकित्सालय पहुंच गई है।
डॉ. कल्ला ने पीबीएम चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. परमिन्दर सिरोही एवं जितेन्द्र आचार्य को निर्देश दिए हैं कि कोरोना मरीजों के ईलाज के लिए ऑक्सीजन की अग्रिम आवश्यकताओं का आकलन कर समय पर आर्डर देते रहें। इसकी सप्लाई में किसी भी प्रकार की अड़चन आए तो उन्हें (डॉ. कल्ला) इसके बारे में जानकारी दें।
डॉ. कल्ला ने बताया कि बीकानेर जिले में कोरोना मरीजों के उपचार सबंधी व्यवस्थाओं के लिए वे लगातार जिला प्रशासन, पीबीएम चिकित्सालय, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्त्ताओं से चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीकानेर के पीबीएम चिकित्सालय में पहले मात्र 20 बैड पर ऑक्सीजन उपलब्ध थी, लेकिन अब वहां पर 800 बैड पर ऑक्सीजन उपलब्ध है। पीबीएम में पहले वेंटीलेटर वाले करीब 20 बैड थे, जो अब बढ़कर 100 हो गए हैं।
जलदाय मंत्री डॉ. कल्ला ने बताया कि बीकानेर में बेहतरीन चिकित्सा व्यवस्थाओं के लिए वे निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने अपने विधायक कोष से एक करोड़ रुपये की राशि संक्रामक रोगों के उपचार के लिए पृथक से चिकित्सालय निर्माण के लिए दी है। इसके साथ ही डीएमएफटी फंड और अन्य स्रोतों से इसके लिए और धनराशि की व्यवस्था करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
बता दें कि लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति केंद्र द्वारा राज्यों को की जाती है, जिसे राज्य आवश्यकता अनुसार जिलों को सप्लाई करते हैं।
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