18 August 2026 10:20 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। पुलिस का काम आमजन को निडरता देना है, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी आमजन को बिना अपराध के ही डरा धमकाकर न सिर्फ आमजन में भय पैदा करते हैं बल्कि पुलिस की छवि भी धूमिल कर देते हैं। जबकि राजस्थान पुलिस का नारा है अपराधियों में भय, आमजन में विश्वास।
ताज़ा मामला बीकानेर के रणजीतपुरा थाने से आया है। यहां के दो पुलिसकर्मियों की हरकत ने शर्मसार कर दिया है। मामला महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी में एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्र माणकासर, बज्जू निवासी सुरेश भादू से जुड़ा है। सुरेश वकालत की पढ़ाई के साथ साथ कोर्ट में प्रशिक्षण भी ले रहा है। आरोप है कि 12 अगस्त की रात रणजीतपुरा थाने के कांस्टेबल लालाराम व कांस्टेबल जगदीश ने बिना किसी अपराध के उसके साथ मारपीट की, उसे रातभर लॉकअप में रखा और उसकी गाड़ी भी जब्त कर ली।
ये है आरोप: सुरेश भादू का कहना है कि रणजीतपुरा थाने में उसका कांस्टेबल मित्र राजेश पोस्टेड है। वह आवश्यकता पड़ने पर राजेश से पैसे लेता रहता है। राजेश भी यथासंभव 2-5 हजार की मदद करता है। राजेश व सुरेश ने कांस्टेबल की तैयारी साथ की थी, मगर सुरेश कांस्टेबल नहीं बन पाया। उसने वकालत का रास्ता चुना।
12 अगस्त को वह गोड़ू अपने ससुराल जा रहा था। तभी राजेश का फोन उसके पास आया था। राजेश ने उसे मिलने को बुलाया तो वह रणजीतपुरा थाने चला गया। सोचा राजेश से मिलना भी हो जाएगा, पैसे भी दे दूंगा।
पीड़ित का कहना है कि वह राजेश से मिला। उसने एक हजार रूपए दिए। राजेश किसी काम में व्यस्त था तो उसने कहा, 10-20 मिनट बाहर बैठो, एक काम निपटा के आता हूं, फिर बात करते हैं।
सुरेश बाहर बैठा था, तभी लालाराम आया। उसने असभ्य लहजे से पूछा कौन है तू, यहां क्या कर रहा है। तो उसने कहा कि राजेश का मित्र हूं। आरोप है कि राजेश का नाम लेते ही लालाराम भड़क गया। बोला, राजेश का मित्र है तो क्या हुआ? राजेश कोई खुदा थोड़ी है। गाली-गलौज करने लगा। जब सुरेश ने कहा कि वह लॉ का स्टूडेंट है तो लालाराम ने गाली-गलौज करते हुए सुरेश को कहा कि तुम नशेड़ी और तस्कर हो। तो सुरेश ने कांस्टेबल से कहा कि पी तो आपने रखी है। आरोप है कि लालाराम नशे में था, उसके मुंह से शराब की बदबू आ रही थी। इस पर कांस्टेबल ने जगदीश के साथ मिलकर उसे उठाया और थाने के पीछे ले गये। वहां ले जाकर कहा कि स्वीकार कर लो कि तुम नशा बेचते हो। सुरेश पर दबाव बनाने लगे। सुरेश नहीं माना तो उसे थाने के पीछे स्थित पुलिस क्वार्टर में ले गये। वहां पर सुरेश को बांधकर उसके साथ मारपीट व गाली-गलौज की गई। सुरेश का कहना है कि उसे 10-11 बजे तक प्रताड़ित किया गया। फिर लॉकअप में डाल दिया। उसकी कैंपर गाड़ी जब्त कर ली। उसे शांतिभंग की धारा में गिरफ्तार कर लिया। धमकाया कि किसी से मारपीट के बारे में कहा तो फिर से अंदर डालकर पीटेंगे।
-पुलिस ने अपने साथी कांस्टेबल पर भी उठाया हाथ: सुरेश का आरोप है कि जब थाने के अंदर उससे बद्तमीज़ी करते हुए उसे अपराधी साबित करने का प्रयास किया जा रहा था, तब कांस्टेबल राजेश बीच बचाव करने भी आया। उसने कहा कि सुरेश मेरा मित्र है, मुझसे मिलने आया है। इस पर लालाराम व जगदीश ने कांस्टेबल राजेश से भी धक्का-मुक्की की।
-लालाराम व जगदीश द्वारा बदसलूकी करने के सबूत भी मिले: बताया जा रहा है कि सुरेश द्वारा कांस्टेबल लालाराम व जगदीश पर लगाए जा रहे आरोपों को साबित करने वाले सबूत भी पीड़ित के पास हैं। पीड़ित ने एसपी मृदुल कच्छावा को आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी है।
-पुलिस का व्यवहार कठघरे में, अक्सर आमजन को रहती है शिकायत: बता दें कि यह पहला मामला नहीं है जब किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की बदसलूकी व मारपीट हुई है। बीकानेर के थानों में अक्सर बदसलूकी की बातें सामने आती रहती है। ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि पुलिस पीड़ित को ही धमकाने लगती है। जबकि पुलिस मुख्यालय व एसपी द्वारा पुलिस को व्यवहारकुशल रहने की सीख लगातार दी जाती रही है। किसी भी एसपी से मिलने वाले फरियादी को किसी एसपी की भाषा से या उसकी व्यवहारिकता से कोई शिकायत नहीं रहती। लेकिन थानों से ऐसी शिकायतें बाहर आती रहती है। ऐसे में यह सवाल है कि जनता को आईजी एसपी जैसे बड़ी रैंक के अधिकारियों से शिकायत क्यूं नहीं होती? थानों से ही ऐसी शिकायतें क्यूं होती है? जवाब एक ही है, बड़े अधिकारी व्यवहारकुशल होते हैं। थाना स्तर पर बदसलूकी होती है। अब देखना यह है कि रणजीतपुरा थाने के इस मामले में एसपी मृदुल कच्छावा क्या एक्शन लेते हैं। एसपी मृदुल कच्छावा का एक्शन उन सैकड़ों आम व्यक्तियों में पुलिस के प्रति विश्वास भरेगा जो हर दिन किसी न किसी पुलिसकर्मी की बद्तमीज़ी से खुद को अपमानित महसूस करते हैं।
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