22 September 2026 10:55 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। (पत्रकार रोशन बाफना की रिपोर्ट) बीकानेर नगर निगम चुनाव में लगातार पिछड़ रही भाजपा को अंत में खुशियों का गुब्बारा मिल ही गया। भाजपाई पार्षद पंकज गहलोत अब बीकानेर के उपमहापौर बन चुके हैं। उन्हें 40 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की नसीम बानो को 38 वोट मिले।
पार्षद चुनाव में 42 सीटें और महापौर चुनाव में 50 वोट हासिल करने वाली कांग्रेस को उप-महापौर के चुनाव परिणाम सुनकर एक हजार वॉट का झटका लगा। एक तरह से यह परिणाम झटकेदार ही था। वजह, जनता ने पहले ही कांग्रेस को 42 पार्षदों का बहुमत दे रखा था। फिर आठ की बढ़ोतरी महापौर चुनाव में हो गई थी।
अब सवाल यह है कि उपमहापौर चुनाव में आख़िर भाजपा को 40 वोट कैसे मिले? जबकि महापौर चुनाव में 27 पार्षदों वाली भाजपा ने 30 वोट हासिल किए थे। ये नये दस कहां से आए। जीत हार के कारणों पर मंथन करें तो पता चलता है कि कांग्रेस के हाथों से बाजी निकलने की बड़ी वजह नोटा और खाली पर्ची मानी जा रही है। एक वोट नोटा को गया, यानी दोनों में किसी को भी पसंद नहीं किया गया। जबकि दूसरा वोट खारिज हुआ। पता चला है कि खारिज होने की वजह खाली पर्ची थी। यानी एक पार्षद ने पर्ची तो डाली मगर उसपे ठप्पा नहीं लगाया। यही वो वोट थे जिससे कांग्रेस पीछे हुई। अगर ये वोट कांग्रेस को मिलते तो कांग्रेस और बीजेपी में मैच टाई हो जाता।
ख़ैर, ये तो हुई एक बात, बड़ा सवाल यह है कि भाजपा के दस वोट कैसे बढ़े। तीन तो महापौर चुनाव में ही बढ़ चुके थे। इसलिए अब दस वोट पर ही मंथन हो रहा है। ये तो साफ है कि कांग्रेस के पार्षदों व पक्ष में आए निर्दलीय पार्षदों ने मिलकर बाजी पलट दी। ये कहना तो मुश्किल है कि इन निर्णायक वोटों में कांग्रेस के बागी वोट कितने थे मगर मोटा मोटा गणित लगाएं तो पता चलता है कि चालीस में 27 बीजेपी के खुद के वोट होंगे। दस निर्दलीय होंगे। हमारी तहकीकात में दस निर्दलीयों के वोट बीजेपी के पंकज के पक्ष में जाने की बात लगभग पुष्ट हो रही है। यानी कुल हुआ 37, अब ट्विस्ट यहीं है। तीन वोटों में तीनों ही वोट कांग्रेस के लग रहे हैं। हालांकि एक वोट आरएलपी का होने की भी आशंका है।
वहीं बात कांग्रेस की करें तो बहुमत के आंकड़े में से भी वह चार वोट माइनस हो गई। बढ़त के आठ वोट तो गायब हुए ही। फिलहाल कयासों का दौर जारी है, मगर मोटा-मोटा गणित यह है कि कांग्रेस की हार के पीछे एक नोटा, एक खाली पर्ची व तीन कांग्रेसी रहे होंगे। हालांकि निर्दलीय तो कारण हैं ही।
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