14 May 2026 07:15 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। बीकानेर का हाल तो आपसे छिपा नहीं होगा। टूटी सड़कें, बेतरतीब सीवरेज चैंबर, गढ्ढ़े, कचरा और गंदगी अब बीकानेर का नसीब बन चुका है। बीकानेर की इस दुर्दशा से नेताओं को मतलब है ना ही प्रशासन को। पिछले 7-8 सालों से बीमार बीकानेर पिछले तीन सालों में वार्ड से आईसीयू में आ चुका है।
इस बार मुद्दा जैन स्कूल से मोहता सराय जाने वाली सड़क का है। लंबे अरसे के इंतज़ार के बाद बनी यह सड़क अब कचरा पट्टी बन चुकी है। आप इस सड़क का वीडियो देखेंगे तो आपको गुस्सा आएगा। अफसोस होगा आपको अपने दिए वोट पर। कुलमिलाकर आपके मन-मस्तिष्क में बहुत कुछ उथल-पुथल होगी।
अच्छी खासी सड़क को दोनों तरफ से कचरे से भर दिया गया है। हालात यह है कि कहीं कहीं सामने एक चौपहिया वाहन आ जाए तो दूसरी तरफ से आ रही मोटरसाइकिल भी निकल नहीं पाती है।
-आख़िर कौन गिराता है कचरा: नगर निगम बीकानेर के कर्मचारियों की आंखें बंद है या सबकुछ देखकर अनदेखा किया जा रहा है या तो निगम खुद ही कचरा गिरा रहा है यह तो नगर निगम ही जाने मगर एक बात स्पष्ट है कि अब इस शहर का कोई जिम्मेदार मालिक नहीं है। इस रोड़ से हर दिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। नगर निगम के ट्रेक्टर तो खुद यहां कचरा फेंक कर जाते हैं। फिर किसको दोष दें?, किसके आगे अर्जी लगाएं?
-बढ़े साधन संसाधन मगर स्मार्ट नहीं बना बीकानेर: पिछले 10-15 सालों में अत्याधुनिक साधन संसाधन बढ़े। खूब बजट भी मिल रहा है। इसके बावजूद बीकानेर के हालात नहीं सुधरे। उल्टा कचरा पट्टी बढ़ी है। जैन स्कूल से मोहता सराय चौराहे तक कचरा पट्टी बना दी गई है। ऐसा हाल बीकानेर के हर इलाके का है। बात बीकानेर को स्मार्ट सिटी बनाने की हो रही थी मगर यहां तो आधारभूत सफाई व्यवस्था, सड़कें, सीवरेज व बिजली पानी का सिस्टम ही दुरुस्त नहीं हो पाया।
-निगम के नये आयुक्त एक्टिव मगर नीचे की श्रेणी शिथिल: बीकानेर नगर निगम फिलहाल प्रशासन के हाथ में हैं। आईएएस सिद्धार्थ पालानीचामी निगम के नये आयुक्त है। कुछ दिनों पहले ही ज्वाइन किया। काफी सक्रिय भी है मगर नगर निगम नाकारा कर्मचारियों का गढ़ है। अगर हमारा नगर निगम अपनी जिम्मेदारियां समझता तो बीकानेर काफी साफ सुथरा हो सकता है। हालांकि जनता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अब देखना यह है कि नये आयुक्त इस निगम को कितना सुधार पाते हैं। जब तक निगम नहीं सुधरेगा, शहर सुधर ही नहीं पाएगा।
-जनता के मुद्दों पर खामोश चुने हुए जनप्रतिनिधि: बीकानेर की इस दुर्दशा के पीछे सबसे बड़ी जिम्मेदारी यहां की राजनीति है। जनता के मुद्दों पर चुने हुए जनप्रतिनिधि कोई ख़ास रूचि नहीं दिखाते। अगर उन्हें जनता के मुद्दों में रूचि होती तो बीकानेर इतनी बदतर स्थिति में नहीं होता।
-जिम्मेदारों पर कार्रवाई, सड़क को कचरे से मुक्ति: अब देखना यह है कि बीकानेर की इस सड़क को देखकर नगर निगम क्या एक्शन लेता है? निगम को इस सड़क को तुरंत कचरे से मुक्त करना चाहिए। वहीं इस सड़क की ऐसी दुर्दशा करने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। बता दें कि यहां रोज नगर निगम कज ट्रेक्टर देखे जाते हैं। देखें वीडियो
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