28 March 2026 10:52 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल पीबीएम की तबीयत इन दिनों कुछ अधिक ही बिगड़ी नज़र आ रही है। हालात यह है कि यहां के कर्मचारी अब जनता की तो छोड़ो, अपने सर्वोच्च अधिकारी की बात भी नहीं मान रहे।
मामला पीबीएम के जिला मुख्य नर्सिंग अधीक्षक की कुर्सी से जुड़ा है। इस कुर्सी में ऐसा आकर्षण है कि इसके लिए पीबीएम अधीक्षक डॉ बीसी घीया के आदेशों को भी हवा किया जा रहा है।
दरअसल, हाल ही में राज्य सरकार ने नर्सिंग अधीक्षकों की पदोन्नति सूची जारी की थी। इसमें वरीयता क्रम के अनुसार बीकानेर के तीन नर्सिंग अधीक्षकों को पदोन्नत किया गया। बताया जा रहा है कि क्रमानुसार सबसे ऊपर लता नायर, दूसरे नंबर पर सीताराम बंजारा व तीसरे नंबर पर किरण रोहिला है। ऐसे में पीबीएम अधीक्षक डॉ बीसी घीया ने जिला मुख्य नर्सिंग अधीक्षक के पद पर लता नायर को लगा दिया। इस संबंध के लिखित आदेश जारी किए मगर वहां पहले से मौजूद सीताराम बंजारा ने जायका बिगाड़ दिया। बताया जा रहा है कि जब लता जिला मुख्य नर्सिंग अधीक्षक का पदभार ग्रहण करने गई तो उन्हें खाली लौटना पड़े। आरोप है कि सीताराम ने चार्ज देने से मना कर दिया जबकि अधीक्षक ने स्पष्ट आदेश दे रखे थे।
-नर्सिंग असमंजस में, तनातनी जोर पर: अब सीताराम व लता दोनों अपनी अपनी कुर्सियां लगाकर बराबर बैठ रहे हैं। तनातनी का माहौल है। नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि अपनी समस्याएं किसके पास लेकर जाएं, यह समझ नहीं आ रहा। ऐसे में व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। दूसरी तरफ पीबीएम अधीक्षक की प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले भी पीबीएम अधीक्षक के आदेशों की अवहेलना की बातें सामने आई है।
-कौन है पीछे जिसके बूते कार्यवाहक अधीक्षक नहीं छोड़ रहा कुर्सी: जिला मुख्य नर्सिंग अधीक्षक की कुर्सी को ना छोड़ने की वजह से अब चर्चाएं भी जोरों पर है। सवाल है कि आख़िर सीताराम बंजारा पर किसका हाथ है जो वे पीबीएम अधीक्षक का आदेश ना मानने की हिम्मत कर पा रहे हैं। जबकि सीताराम को कुछ माह पहले कार्यवाहक के तौर पर जिला मुख्य नर्सिंग अधीक्षक लगाया गया था। अब जब डीपीसी हुई तो सरकार ने लता नायर को सीनियर माना। ज्वाइनिंग के आधार पर वें दस दिन सीनियर हैं तथा डीपीसी के आधार पर एक वर्ष सीनियर हैं। जिला मुख्य नर्सिंग अधीक्षक पर पदोन्नति वरीयता के आधार पर ही होती है। बताया जा रहा है कि सीताराम को कार्यवाहक लगाना भी एक तरह से ग़लत भी था। वजह, जिला मुख्य नर्सिंग अधीक्षक का पद हमेशा वरीयता क्रम के आधार पर ही मिलता है।
-8-9 नर्सिंग अधीक्षक भी बिना स्वीकृति के काबिज: दूसरी बात यह भी है कि पीबीएम में केवल चार विभाग में ही नर्सिंग अधीक्षक स्वीकृत है। शेष 8-9 के लिए राज्य सरकार से स्वीकृति ही अब तक पेंडिंग हैं। ऐसे में पीबीएम की तबीयत तो बिगड़नी ही है।
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