07 October 2026 11:50 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। बीकानेर विकास प्राधिकरण ने इन दिनों रिसोर्ट व भू मालिकों की नींदें उड़ा रखी है। लगातार नोटिस व सीज की कार्रवाईयों से बीकानेर के रिसोर्ट व भू-मालिक परेशान है। मामला रिड़मलसर पुरोहितान, नैणों का बास, रिड़मवसर सिपाहियान व शिवबाड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि बीडीए यानी बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा इन क्षेत्रों में जान-बूझकर गलत कार्रवाइयां की जा रही है।
कहीं बीडीए द्वारा निजी भूमियों को बीडीए की भूमि बताकर सीज की कार्रवाई की गई तो कहीं नोटिस देकर कानूनी दांवपेंच में उलझाया गया। आरोप है कि बीडीए रसूखदार व्यक्तियों के इशारे पर अपनी शक्तियों का दुरूपयोग कर रहा है।
-क्या है मामला: दरअसल, बीडीए ने पिछले कुछ माह में रिड़मलसर पुरोहितान, नैणों का बास व रिड़मलसर सिपाहियान क्षेत्र की जमीनों पर अपना हक जताया। कहा कि ये ज़मीनें हमारी है। किसी को नोटिस दिया, किसी की भूमि को सीज कर दिया।
-जबकि सच है उल्टा: बीडीए की इन कार्रवाइयों पर सवाल खड़े होने के पीछे तीन बड़े कारण है।
पहला, रिड़मलसर पुरोहितान, नैणों का बास, रिड़मलसर सिपाहियान, शिवबाड़ी के राजस्व नक्शे ही उपलब्ध नहीं है। बीडीए व प्रशासन ने स्वयं बार बार ये कहा है कि उनके पास इन ग्रामों के राजस्व नक्शे ही नहीं है। जब नक्शे नहीं तो बीडीए किस आधार पर यह तय कर रहा है कि उसकी भूमि कहां पर है?
दूसरा, दरअसल, राजस्थान सरकार ने वर्ष 2012 में ही एक आदेश जारी कर इन ग्रामों का नियमन मौके की स्थिति के अनुसार कर दिया था। यानी जो जहां बैठा है उसे वहीं पर कागजों में वर्णित क्षेत्रफल के बराबर भूमि दे दी गई। ऐसे में किसी को उसकी जमीन से बेदखल करना, कब्जा करना या सीज करना कहां तक जायज है?
तीसरा, इस क्षेत्र के कई भू-मालिकों ने बीडीए में भू-रूपातंरण हेतु आवेदन कर रखा है। मगर बीडीए इन आवेदनकर्ताओं को यह कह रहा है कि बीडीए के पास राजस्व नक्शा ही नहीं है, ऐसे में भू-रूपातंरण कैसे करें।
बता दें कि बीडीए द्वारा की जा रही इन कार्रवाइयों को तानाशाही के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह है कि इतना सबकुछ खुल्लमखुल्ला हो रहा है फिर जिम्मेदार लोग चुप क्यों हैं? क्या बीडीए के सामने सभी जनप्रतिनिधि नतमस्तक है। या जनप्रतिनिधि भी किसी दबाव में हैं। सवाल कई हैं, होंगे भी क्योंकि जनता के टैक्स के पैसे से तनख्वाह पाने वाले सरकारी कर्मचारी अपना कर्तव्य भूल गए हैं।
सरकारी तंत्र को यह समझना चाहिए कि जिस जनता के टैक्स से उन्हें तनख्वाह मिलती है उसे बेवजह प्रताड़ित ना करें। अब देखना यह है कि नियमों की धज्जियां यूं ही उड़ती रहती है, शक्तियों का दुरूपयोग होता रहता है या सरकारी तंत्र की आत्मा जागती है!
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