30 May 2026 06:54 PM


ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। बीकानेर के सार्वजनिक कार्यों में उपनगर गंगाशहर का योगदान हमेशा से ही सबसे ऊपर रहा है। लेकिन भामाशाहों की इस नगरी के साथ सिस्टम ने हमेशा से ही उपेक्षा भाव रखे हैं। हमारा सिस्टम यहां अच्छी सड़क नहीं दे पाया। अच्छा सीवरेज सिस्टम नहीं दे पाया। एक सैटेलाइट अस्पताल है तो वह भी अधिकतर भामाशाहों की मेहरबानी से है। पार्क, खेल मैदान, भवन, ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं तो भूल ही जाओ।
कुछ ना दिए जाने तक तो ठीक था, जनता सबकुछ सहन कर ही रही थी मगर अब जनता से उसका एक शताब्दी पुराना नगर निगम भी छीनने की तैयारी की जा रही है।
ये है मामला: बीकानेर पहले तीन नगर पालिकाओं में विभक्त हुआ करता था। रियासतकाल में ही इसकी शुरुआत हो गई थी। एक शताब्दी पहले इन पालिकाओं का गठन किया गया था। इनमें बीकानेर, भीनासर व गंगाशहर नगर पालिका थी। गंगाशहर नगर पालिका का गठन वर्ष 1939 में किया गया। ये तीनों पालिकाएं स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1982 तक भी अस्तित्व में रही। फिर गंगाशहर व भीनासर नगर पालिका का विलय बीकानेर नगर परिषद् में कर दिया गया।
लैंड मार्क वही, परिसर भी वही, लेकिन अब नगर पालिका नगर निगम ईकाई के रूप में पहचाना जाने लगा। यहां तब से अब तक जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, सफाई व्यवस्था, रोड़ लाइट व्यवस्था, भूमि संबंधित कार्य होते रहे। भूमि सहित विभिन्न सरकारी दस्तावेज भी यहीं से मिल जाते। विभिन्न स्वीकृतियां भी यहीं से मिल जाती। कुछ वर्षों से यहां ई-मित्र व आधार सेवा केंद्र, इंदिरा रसोई भी चल रही है।
-निजी भूमि पर बना था नगर निगम, निगम हार गया केस: दरअसल, जिस जमीन पर नगर पालिका और अब नगर निगम बना हुआ है, यह ज़मीन निजी संपत्ति है। भूमि मालिक ने निगम पर केस कर रखा था। निगम इस भूमि पर केवल किराएदार है। कुछ माह पहले निगम यह केस हार गया। सितंबर तक का किराया भरा हुआ बताते हैं। ऐसे में अब निगम को यह भूमि खाली करनी होगी। हालांकि आयुक्त नगर निगम ने ख़बरमंडी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि वर्तमान कार्यालय से कुछ कर्मचारी ही हटाए हैं। शेष कार्य सुचारू हैं। स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग में यह तय होगा कि फैसले को ऊपरी अदालत में चैलेंज किया जाएगा या नहीं। वहीं दूसरी ओर जनता का कहना है कि गंगाशहर नगर निगम में काम रुके हुए हैं। सवाल यह है कि अगर यह कार्यालय खाली करना पड़ा तो निगम कार्यालय कहां जाएगा। वर्तमान स्थिति में तो गंगाशहर से निगम की छीनने की पूरी तैयारी है।
-लंबे समय से थी जानकारी, फिर भी नहीं की नई व्यवस्था, जनता जागी तो जागने लगे दलगत नेता: निगम जब केस हारा तो निगम का कार्यालय ही गंगाशहर से उठाने की तैयारी कर बैठा। जबकि निगम को यह पहले से पता था कि एक दिन जमीन हाथ से निकल जाएगी। ऐसे में निगम को पहले से ही गंगाशहर के अंदर ही गंगाशहर नगर निगम का कार्यालय शुरू करने की वैकल्पिक व्यवस्था रखनी चाहिए थी। मगर निगम ने ऐसा कुछ नहीं किया। दलगत जनप्रतिनिधियों की शिथिलता भी इस स्थिति के पीछे बड़ा कारण है। दलगत जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। जब सोशल मीडिया पर माहौल गर्माया तब सब जागने लगे। अब कुछ दलगत जनप्रतिनिधि भी सक्रिय हुए हैं। हालांकि बीजेपी जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ व विधायक सिद्धि कुमारी ने प्रयास किया लेकिन विधायक के फोन के बाद तो उल्टा गंगाशहर निगम के कुछ कर्मचारी बीकानेर बुला लिए गए।
-अब युवा जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज़, गंगाशहर नगर निगम बचाओ संघर्ष समिति गठित: गंगाशहर से छिन रहे नगर निगम को बचाने के लिए समाजसेवी मनीष बाफना, रघुवीर प्रजापत, रामदयाल पंचारिया, गोविंद सारस्वत आदि ने समिति गठित की है। मनीष बाफना ने बताया कि इस समिति में भंवरलाल साहू, शिव पड़िहार, कुशल बाफना, सुरेंद्र पटवा, पुखराज सोनी, मनोज पारख, राजेश बैद, नवीन सोलंकी, शिखरचंद डागा, शिव बच्छ, शिवशंकर उपाध्याय, हेमराज जाजड़ा, हेमंत कातेला, इंद्र जाजड़ा, महेंद्र जाजड़ा, सोनू त्रिपाठी, महेश सुथार, मयंक सेठिया, इंद्रचंद गोलच्छा, राजेश बुच्चा, सुधीर लूणावत, नवरत्न बोथरा, मदन सियाग, ओम रामावत, राजकुमार मारू, रवि मारू, गिरीराज सेवग, अंग्रेज कुमावत, महीराम विश्नोई, कालूराम कुम्हार, दिलीप कातेला, पंकज बैद, अमित भूरा, हितेश छाजेड़ सहित हजारों लोग जुड़ चुके हैं।
मनीष बाफना ने कहा कि गंगाशहर का नगर निगम कार्यालय गंगाशहर सहित सुजानदेसर, भीनासर व इसके आसपास निवास कर रहे हजारों नागरिकों के लिए जरूरी ईकाई है। अगर यह कार्यालय यहां से गया तो इस क्षेत्र के नागरिकों को हर दिन परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। रघुवीर प्रजापत ने बताया कि हम हर स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार है। गंगाशहर के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। रामदयाल पंचारिया ने कहा कि गंगाशहर नगर निगम को छीनने का मतलब हमारे बुजुर्गों से सुविधाएं छीनना है। गोविंद सारस्वत ने बताया कि यह संघर्ष समिति दलगत राजनीति से परे है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र का हित करना है। नगर निगम को गंगाशहर क्षेत्र में ही रखना है। गिरीराज सेवग ने सवाल उठाया कि आखिर नगर निगम छीनने की सोच भी कैसे सकते हैं। गंगाशहर में सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, घटाने पर नहीं।
-सामाजिक संस्थाएं व प्रबुद्धजन दे रहे समर्थन, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस : नगर निगम बचाने को लेकर सोशल मीडिया पर माहौल गर्म है। भारी बहस छिड़ी है। स्थानीय नेताओं को भी ट्रोल किया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े मुद्दे पर नेता चुप कैसे रहें। चुप रहे तो रहे, अब जब मुद्दा गरम है, तो समर्थन में आएंगे या राजनीति कर वाहवाही लूटेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर बीजेपी जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़, विधायक सिद्धि कुमारी व विधायक जेठानंद व्यास ने सकारात्मक समर्थन करते हुए प्रशासन से बात भी की है। संघर्ष समिति से जेठानंद व्यास की बातचीत हुई, उन्होंने पूर्ण समर्थन की बात कही। इसी तरह जैन महासभा बीकानेर, श्रीमेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज सेवा संस्था, बीकानेर, श्री नई लेन ओसवाल पंचायती प्रन्यास, गंगाशहर, विप्र फाउंडेशन, गंगाशहर नागरिक परिषद्, पीपा क्षत्रिय समाज, कुम्हार समाज, जाट समाज, रामावत समाज, गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज, सारस्वत ब्राह्मण समाज, नायक समाज, मेघवाल समाज, माली समाज, रंगत फाउंडेशन, आगाज एक बदलाव का संगठन, खाटू श्याम गौ सेवा समिति, अणुव्रत समिति गंगाशहर, अरुणोदय विद्या मंदिर, गंगासागर फाउंडेशन, स्वर्णकार रिलीफ शिल्पकार सोसायटी, पुरानी लाइन ओसवाल पंचायती प्रन्यास आदि ने समर्थन दिया है।
वहीं स्थानीय प्रबुद्धजन जनों में समाजसेवी चंपालाल डागा, समाजसेवी कन्हैयालाल बोथरा, समाजसेवी सोहनलाल चौधरी, इंद्रचंद सिंगी, जतनलाल दूगड़, जवाहरलाल सेठिया, किशनलाल बैद, भैरूंदान सेठिया, भंवरलाल सेठिया, मनोज सेठिया, किशन जोशी व विमलसिंह चोरड़िया आदि ने समर्थन किया है।
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