14 April 2026 10:45 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। नकली व मिलावटी खाद्य सामग्री उत्पादन व विक्रय के मामले में बीकानेर काफी आगे बढ़ रहा है। मिलावटी खाद्य सामग्री की वजह से जन स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही है। ऐसा ही एक मामला बीकानेर में उत्पादित होने वाली नगद नारायण ब्रांड की ऑरेंज टॉफी(नींबू रस की टॉफी) से जुड़ा सामने आया है।
नगद नारायण द्वारा बनाई जा रही ऑरेंज टॉफी जांच में अनसेफ पाई गई है। राजस्थान की फूड सेफ्टी कमिश्नर आईएएस डॉ टी शुभमंगला के आदेश पर बीकानेर के खाद्य सुरक्षा दल ने नगर नारायण की फैक्ट्री में ऑरेंज टॉफी के उत्पादन पर दो माह के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
इसके अतिरिक्त फैक्ट्री में मिली ऑरेंज टॉफियां जब्त कर ली गई है।जानकारी के अनुसार फरवरी में टोंक के निवई की एक दुकान से फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने नगद नारायण की ऑरेंज कैंडी के सैंपल उठाए थे। जांच में यह टॉफी अनसेफ पाई गई। इसमें लिमिट से अधिक रंग मिला है। नियमानुसार एक किलो उत्पाद में कलर की सीमा अधिकतम 100 मिलीग्राम है जबकि नगद नारायण की ऑरेंज टॉफी में कलर की मात्रा 120 मिलीग्राम मिली।
उल्लेखनीय है कि बीकानेर फूड हब के तौर पर जाना जाता है। नमकीन और मिठाईयों के मामले में भी बीकानेर काफी अग्रणी है। मगर पिछले कुछ सालों में यहां मिलावटखोरी बढ़ी है। ख़ासतौर पर दूध, घी, मावा व तेल में मिलावट के मामले बढ़े हैं। दूध के मामले में अक्सर दूध उत्पादकों तक खाद्य सुरक्षा दल पहुंचते ही नहीं है। इसी तरह मावे पर कार्रवाई तो होती है मगर मूल मालिक तक कानून का पंजा ही नहीं पहुंचता। मावे के मामले में कोल्ड स्टोर अक्सर मावा मालिक का नाम ही नहीं बताते। यही हाल तेल उद्योग का है। तेल में मिलावट के मामले भी बढ़े हैं। घी के मामले में तो हालात बहुत ज्यादा खराब है। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट में को दूध, घी, मावा व तेल में हो रही मिलावट पर जड़ तक वार करना चाहिए।
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