09 February 2022 11:56 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। ननद व भाभी के बीच घर को लेकर हुए विवाद में न्यायालय के न्याय से एक महिला व उसकी बेटी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होने से बच गई। मामला नयाशहर थाना क्षेत्र के मुक्ता प्रसाद से जुड़ा है। दरअसल, मीरा पत्नी विरेंद्र आर्य अपने ससुर के मकान में बेटी के साथ निवास कर रही है। पति झारखंड में नौकरी करता है। ननद पुष्पा तलाकशुदा है, इसी वजह से मीरा के ससुर ने मकान उसके नाम कर दिया था। मीरा का नया मकान शिवपुरम में निर्माणाधीन है, ऐसे में अभी वह नये मकान में निवास नहीं कर सकती।
आरोप है कि ननद ने मीरा व उसकी बेटी के लिए टॉयलेट व बाथरूम बंद कर मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर रखा था। वहीं एक दिन जब वह घर पर नहीं थी, तब उसके कमरे का ताला तोड़ उसका सारा सामान ट्रक में भरवाकर उसके नये निर्माणाधीन मकान में छुड़वा दिया।
इसी मामले में ननद ने भाभी को पाबंद करवाने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी। दूसरी ओर अविधिक तरीके से बेघर किए जाने के बाद भाभी ने नयाशहर पुलिस से गुहार लगाई। आरोप है नयाशहर पुलिस ने उसकी सुनवाई के बजाय उसे ही धमकाया।
मामला न्यायालय सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-3 में पहुंचा। अधिवक्ता अनिल सोनी के अनुसार मीरा की ओर से अधिवक्ता मुकेश आचार्य व उन्होंने पैरवी की। न्यायालय के समक्ष मीरा की ओर से पक्ष रखा गया। बताया गया कि मीरा अपनी ननद के मकान पर कब्जा नहीं करना चाहती। उसका मकान निर्माणाधीन है। ऐसे में वह अभी वहां नहीं जा सकती। ननद द्वारा बिना विधिक प्रक्रिया अपनाएं उसे बेघर किया जा रहा है। उसकी मूलभूत सुविधाओं का भी हनन किया गया है। न्यायालय ने सुनवाई के बाद दोनों पक्षों को पाबंद किया। ननद को आदेश दिया कि वह मीरा व उसकी बेटी को टॉयलेट, बाथरूम, बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ना करें। इन टॉयलेट व बाथरूम पर ताला ना जड़ें। ना ही बिना विधिक प्रक्रिया अपनाएं उसे घर से निकाले।
सोनी ने बताया कि न्यायालय ने एक महिला व एक बेटी को बेघर होने से बचा लिया है।
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